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सभी पुष्टिमार्गीय वैष्णव एवं प्रभु श्री गोवर्धन धर श्रीनाथजी के भक्तों के लिए संदेश | Shrinathji Temple, Nathdwara

सभी पुष्टिमार्गीय वैष्णव एवं प्रभु श्री गोवर्धन धर श्रीनाथजी के भक्तों के लिए संदेश

20-Mar-2020

|| श्री कृष्णाय नमः ||

सभी पुष्टिमार्गीय वैष्णव एवं प्रभु श्री गोवर्धन धर श्रीनाथजी के भक्तों के लिए:-

सभी पुष्टिमार्गीय वैष्णव एवं प्रभु श्री गोवर्धन धर श्रीनाथजी के भक्तों को श्रीमान् तिलकायत‌ महाराज की आज्ञानुसार कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों के बारे में सूचित किया जाना आवश्यक है।

आज समस्त विश्व  कोविड-19 की महामारी से युद्ध लड़ रहा है और भारत भी इस युद्ध में शामिल हो चुका है। एक ख्यातनाम न्यूज़ एजेंसी द्वारा ज़ारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत इस समय इस महामारी के स्टेज 2 से गुजर रहा है। इसका अर्थ यह है कि भारत में हम अभी इस महामारी के रोकथाम की स्टेज पर हैं। आने वाले 14 दिन यह निर्धारित करेंगे कि हम इसे यहीं रोकते हैं या उसकी अगली स्टेज पर पहुंच जाते हैं और यह सब *इस देश के लोगों पर अर्थात हम सब पर निर्भर करता है* ।

केंद्र एवं राज्य सरकारों ने आवश्यक कदम उठाए हैं, ताकि इस वायरस को इसकी रोकथाम स्टेज पर रोका जा सके। इनमें से एक कदम है कि लोगों को घर पर रुकने की सलाह देना, सामाजिकता से दूरी तथा यह 2 सप्ताह इस वायरस को बिना फैलाए सावधानी से निकाल लेना।

इन्हीं सबके बीच में नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर में दर्शन बंद होने की अफवाहें भी जोर पकड़े हुए हैं। 

इसलिए यह सूचित करना अत्यावश्यक है कि प्रभु चरण श्री गुसाईं जी की कानी के अनुसार पुष्टिमार्ग में लीला नित्य की जाती है और सरल शब्दों में कहें तो सेवा एवं दर्शन कभी बंद नहीं हो सकते।

इसी के चलते, पूज्यपाद तिलकायत  महाराज ने सेवा व्यवस्था के सूसंचालन तथा सभी जीवों के कल्याणार्थ, केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों को दृष्टिगत रखते हुए कुछ निर्णय लिए हैं। आचार्य की गादी पर आसीन श्रीमान् तिलकायत महाराज ने आज्ञा करी है कि श्रीनाथजी मंदिर में गुसाँई जी का अष्टयाम सेवाक्रम यथावत ज़ारी रहेगा और दर्शन केवल अंदर ही खुलेंगे।

यह भीड़ इकट्ठी न हो, इसको रोकने के लिए किया गया है, जो (भीड़) इस वायरस के फैलने का मूल कारण है। 

इस आज्ञा का मूल अर्थ तत्सुख है। हमारे प्रभु सिर्फ भगवान ही नहीं बल्कि हमारे घर के बालक के रूप में भी बिराजमान हैं। श्री गुसाईं जी के अपरस की मर्यादा और मेंड़ भी हमें प्रभु के पास बिना स्वच्छता और अपरस स्नान के जाने से रोकते हैं। अतः पूज्यपाद तिलकायत महाराज का यह कर्तव्य है कि वे बालकृष्ण व उनके समस्त वैष्णव समाज की रक्षा करें।

प्रभु के द्वार के बाहर खड़े वैष्णवों के  फोटो चारों और वायरल हो रहे हैं। लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से, उन सभी जीवों से, जिन्हें दर्शन नहीं हुए हैं, अपील करता हूँ कि वह इसे गोवर्धनधर प्रभु के विप्रयोग के प्रसाद के रूप में ग्रहण करें और अपना समय प्रभु स्मरण में व्यतीत करें।

कृपया इस बात का स्मरण करें कि संयोग और वियोग, श्रृंगार रस के दो भाग है। यह एक दूसरे के पूरक हैं और एक दूसरे के बिना इनका कोई अस्तित्व नहीं है।

उस समय पर नजर डालते हैं जब फाल्गुन कृष्ण सप्तमी को भक्तों की मनोरथ पूर्ति हेतु श्रीनाथजी सतघरा पधारे और उन्होंने जतीपुरा के अपने जीवों को भी विप्रयोग में छोड़ दिया जब तक कि वे नृसिंह जयंती को वापस ना लौट आए।

भ. कुंभन दास जी ने अपना विप्रयोगात्मक भाव "श्री गोवर्धन वासी सांवरे लाल तुम बिन रह्यो ना जाए"पद  द्वारा प्रकट किया।

ऐसी ही स्तिथि सन 1918 में भी उत्पन्न हुई थी जब स्पेनिश फ्लू के प्रकोप को दृष्टिगत रखते हुए तत्कालीन तिलकायत महाराज नि. ली. गो. ति. १०८ श्री गोवर्धन लालजी महाराजश्री ने भी ऐसा ही निर्णय कर, जैसा की पूज्यपाद तिलकायत महाराजश्री ने किया है, मंदिर में केवल अंदर ही दर्शन खोल, निर्धारित समय के लिए आम जनों/वैष्णवों/दर्शनार्थियों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। 

अतः पूज्यपाद तिलकायत महाराज के आग्रह और आदेशानुसार आप सभी इस समय को विप्रयोग के दान की तरह लें और इस दान का प्रसन्नता पूर्वक आनंद ले। *घर पर सुरक्षित रहें और सामूहीकरण का निर्वहन न करें*।

कृपया मंदिर बंद है या दर्शन बंद है, ऐसे शब्दों को प्रोत्साहित न करें और न ही इसे बढ़ावा दें।

नाथद्वारा मंदिर के परिपेक्ष में वायरल हो रही अफवाहों और अनौपचारिक संदेशों को ना फैलाएं।

मंदिर का सेवाक्रम उसी तरह संपादित होता रहेगा जैसा होता आया है। यह समय भी निकल जाएगा और जब हम प्रभु कृपा से इस वायरस पर काबू पा लेंगे और बाहरी वातावरण को सुरक्षित बना लेंगे, *तब विरह अग्नि का यह ताप हमें श्री गोवर्धन धर से एकीकृत कर देगा* ।

 *इति शुभम*

*गो. चि. विशाल बावा  
* नाथद्वारा *